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बाल विकास

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शिक्षण नवीन विधाएँ (उपागम)।बाल-केन्द्रित शिक्षण उपागम।क्रिया/गतिविधि आधारित शिक्षण

शिक्षण नवीन विधाएँ (उपागम) [New Approaches of Teaching] हेल्लो दोस्तों आज हम बात करेंगे शिक्षण नवीन विधाएँ (उपागम) से सम्बन्धित बाल-केन्द्रित शिक्षण उपागम क्या है , इसकी विशेषताएँ , बाल-केंन्द्रित शिक्षण का महत्त्व तथा क्रिया/गतिविधि आधारित शिक्षण क्या है ,गतिविधियों पर आधारित शिक्षण विधि , गतिविधि आधारित शिक्षण विधि (क्रियापरक विधि) के प्रकार , गतिविधि आधारित शिक्षण विधि (क्रियापरक विधि) की विशेषताएँ। आदि के बारे में विस्तार से 👍 1. बाल-केन्द्रित शिक्षण उपागम (CHILD-CENTRED TEACHING APPROACH) प्राचीनकाल की शिक्षा शिक्षक केन्द्रित शिक्षा थी। शिक्षक जैसे चाहता था उसी प्रकार से शिक्षा देता था। इसमें बालक की अपेक्षा पाठ्यक्रम को अधिक महत्त्व दिया जाता था परन्तु शिक्षा में मनोविज्ञान के प्रवेश से बालक को महत्त्व दिया जाने लगा है। अब बालक की रुचियों, रुझानों तथा क्षमताओं को महत्त्व दिया जाने लगा है। पाठ्यक्रम के निर्धारण में भी इन बातों का ध्यान रखा जाता है। बाल-केन्द्रित शिक्षण का मुख्य उद्देश्य बालक का सर्वांगीण विकास करना है। बाल-केन्द्रित शिक्षण की विशेषताएँ (Characteristics of Child-C...

पावलव का सम्बद्ध प्रतिक्रिया का सिद्धान्त Pavlov ka sambaddh pratikriya ka siddhant

पावलव का अनुकूलित अनुक्रिया का सिद्धान्त ( I. P. PAVLOV'S CLASSICAL CONDITIONING THEORY) I. P. Pavlov : इनका पूरा नाम इवान पी. पावलव है। सम्बद्ध प्रतिक्रिया सिद्धान्त का प्रतिपादन रूसी मनोवैज्ञानिक आई. पी. पावलव ने किया था। इस सिद्धान्त को सम्बन्ध प्रत्यावर्तन का सिद्धान्त भी कहते हैं। इस मत के अनुसार-सीखना एक अनुकूलित अनुक्रिया है। बर्नार्ड के शब्दों में- अनुकूलित अनुक्रिया उत्तेजना की पुनरावृत्ति द्वारा व्यवहार का स्वचालन है जिसमें उत्तेजना पहले किसी विशेष अनुक्रिया के साथ लगी रहती है और अंत में वह किसी व्यवहार का कारण बन जाती है जो पहले मात्र रूप से साथ लगी हुई थी।"  यह माना जाता है कि उद्दीपक के प्रति अनुक्रिया करना (Stimulus-Response) मानव की प्रवृत्ति । जब मूल उद्दीपक के साथ एक नवीन उद्दीपक प्रस्तुत किया जाता है तथा कुछ समय पश्चात् जब मूल उद्दीपक को हटा दिया जाता है तब नवीन उद्दीपक से भी वही अनुक्रिया होती है जो मूल उद्दीपक से होती है। इस प्रकार अनुक्रिया नये उद्दीपक के साथ अनुकूलित हो जाती है।  यह प्रक्रिया पावलव द्वारा किये गये निम्नलिखित प्रयोग से स्पष्ट हो जाती है ...

उदाहरण प्रविधि(ILLUSTRATION TECHNIQUE) kya hai. उदाहरण प्रविधि ke prakar

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